लघुकथा अंक
कमी
"अब....अब
ये किसकी कमी है",
"आप तो जानते ही है!",
ऐसा निम्न स्तर का काम?",
"मैं जानता हूं? अं हां हां, दूगुने पगार पर भी.. किसी और को ढूंढ लाओ"
"जी"
‘मास्टर्स इन जी हुजूरी’
(वह मन में बुदबुदाया)
(लघुकथा)
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बुदबुदाहट
"क्यूं बार बार खिलना
जब हैं मिट्टी में मिलना "
"ये कैसी, अजीब तुकबन्दी कर रहे,
कितनी मुर्दनगी हैं इसमें!"
उसने आगे कहा: "क्यूँ इतना सता रहे हो,
बीती जो मुझपे उसे तुम क्या - क्या बता रहे हो",
उसने फिर टोका "कुछ खैर ढ़ाओ ! और आंसू मत बरसाना!"
मगर उसने कहना जारी रखा, "ठीकरा सितारे से टूट गिर रहा,
उम्र कोई और जिये, "मर में रहा", वह उसे और टोकता पर तब
तक बेकार बुदबुदाहट धीरे-धीरे बन्द हो चुकी थी।
(लघुकथा)
Seema Sharma
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