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रविवार, 30 जुलाई 2023

शायरी, दर्द का बंटवारा, युवा और खैर खवाह

दोस्तो आज पेश है मेरी कलम से लिखी एक शायरी, जिसे मैंने सबसे पहले Your Quote App पर सन् २०२० में लिखा था, जिसे आज मैं अपने ब्लॉगिंग साइट पर शेयर कर रही हूं।

—सीमा शर्मा 

शायरी

दर्द का बंटवारा
तक़दीर से लिखे फलसफे के खत पढ़ी जाती हूँ, 
आजकल रोने को मैं गुनगुनाकर सुनाती हूँ, 
तेरी दौलत कहती है,
 तेरे दर से,
किसी कलपते का, 


आना जाना लाजिमी है,
कल ही देख, 
टूटते कदम और टपकती आंसू, 
खुदाई की सोचती हूँ, आसमानी तख्त पर अटूट,
किसी को यकीं  जरूर होगा, 
तेरी बेइंसाफी देख लगता हैं, 
तूने उसके ख्वाब किसी दिन रौंदा जरूर होगा, 
तू भी रुक के देखना, 
तेरे किसी शीशमहल के तले उसका घरौंदा जरूर होगा, 
और,


तेरे सताये से क्या फरमाऊं,
 'सुन ऐ गैरत-दार, 

जो खुदाई करने से तू न हारे, 
तो आगे भी तू न किया बिगाड़,

बस रह सब्र थाम, 
कभी उसी छीनने वाले से ही सुना है, 
रहम फरमाना ही है,
उस सबक़त का काम।

—सीमा शर्मा 


युवा

नई शक्लें बनाते हैं,
मानचित्र में ये नौका चलाते है,
दूर दूर जो हिलोरे खाते है,
वो सागर भी स्वप्न भीगा जाते है, 
कल्पना की दुनिया हैं,
 वो बबलू हैं, वो मुनिया हैं,
खेल खेल में मेरे शहर घुम आते हैं,
 ओ नगर थोड़े और हुए हो विस्तृत
 तो रास्ता छोटा रखना 
मेरी उम्र ज्यादा हो गई हैं।

—सीमा शर्मा



ख़ैर ख्वाह

तेरे लिए दुआ माँगी,
कबूल काबिलियत हुई,
 तेरे लिए आसमान मांगा,
 कबूल, 
उड़ान हुई,
 मांग रही थी, 
ऊंचाई, 
कबूल हिफाजत हुई!

—सीमा शर्मा 



©Seema Sharma
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