यह ब्लॉग खोजें

Gratitude Daily लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Gratitude Daily लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 29 सितंबर 2023

लघुकथा भाग पांच, नरमी, सलाह, और अन्य लघुकथाएं। मशविरा, रोज़ाना की एक बात,

लघुकथा (भाग पांच)
Hello Friends,
 आज पढ़े लघुकथा अंक पांच।



नरमी

"जब बात बिगड़ जाए..........", 

(बीच में टोक कर)

"उसे डांट कर सुधारना "

"अरे रे रे यह क्या कह रहे", 

"आ हां बच्चा बिगड़े तो..."


Father's discussing young generation actions

"मैंने बच्चा नहीं बात कहा था" 
"ओह माफ करना, मेरे बेटे ने मुझे बहूत परेशान कर दिया है, वैसे.. बात बिगड़े तो थोड़ा ज्यादा नर्मी से पेश आया करो" 
"तुम भी..", 
"हां शायद यही ठीक है। 

(लघुकथा)


सलाह मशविरा

"अगर शिकार के मुँह से उफ़्फ़ नहीं निकलेगा! तब भला लाचारगी का क्या भाव मिलता?" "फिर भी दोयम दर्जे के नौकरी से बाज आना चाहिए",
Two person discussing unemployment problem



"कौन जानता है दोयम कौन आ'ला कौन, फिर जितनी होशियारी दिलानी मुनासिब थी हमने दिलाई "

"तब तो ये भी बहुत है", उसने दीदे नीची

कर कहा ।

(लघुकथा)


रोज़ाना की एक बात

"चलो, अकेले ही टहलते हैं",
"भले मरुस्थल ही हो?" 
Man walking in desert


अवाक देखते हुए, उसने इशारा किया। राहगीर समझ सकता उससे पहले एक खंजर उड़ कर सीधे उसके मर्म स्थल लग गया, वह पल के पल में ढेर हो गया। तलाशी लिया गया मात्र कुछ गहने मिले, मगर पीतल के निकले, टोली के सरदार ने अफसोस से कहा, "बेकार मारा गया।"


श श श श 

"अपनी सुनाओ तुम कैसे हो",
"कुछ ठीक नहीं है",
"ओह हुआ क्या?",

" श श श .... धीरे..... मेरी सास सो रही है"

(लघुकथा)


फेसबुक

"शब्दों के धुरंधर को आज शब्द नहीं मिल रहे, बस इतना पूछा है मैंने कुछ कर के भी दिखा देते, मां के लिए जो इतनी कविताएं गढ़ते हो फेसबुक पर ।" 
बगले झांकते बड़े भाई की पत्नी ने कहा: "तुम्हारी भी तो मां है अपने साथ ले जाओ" छोटा सकपका गया।
Interview of an aged writer



अंततः अंतिम संवाद के बाद अंतिम संपत्ति को तीन तीन महीने के लिए भाग किया गया।

(लघुकथा)


लेखिका

"किसी की याद लिखवाती है हमसे

वर्ना आयु का प्रकोप ऐसा है की चार पग। चलूं तो, ऊंह ऊंह", मैं खांसने लगती हूं। पत्रकार : पिचासी की अंक और बस आपकी लेखनी सरपट दौड़ते जा रही हूं, क्या सचमुच में किसी अन्य का ही प्रभाव है?",
Mother's illness and sons


 "ऊंह वह बात ये है, ऊंह ऊंह, ऊंह " मैं अचेत हो कर गिर पड़ी, उपस्थित सभी घबरा गए, मेरे नाम का स्वर, सर्वत्र गुंजायमान था। मैं खांसते खांसते अदृश्य हाथ पकड़ कर आगे बढ़ गई।

(लघुकथा)


घी

"ये बात तो ग़लत है पर सीधी उंगली से घी न निकले तो, उंगली टेढ़ी करनी ही पड़ती है"

"हुंह"

कुछ दिन बाद

पुलिस थाने में परेशान वह एक दूसरे को ताक रहे थे किसी ने घी का डब्बा आग के ऊपर ही रख दिया था।

(लघुकथा)


पार्टनरशिप

"मैंने पूछा था? ना मैंने तुम्हें कभी नहीं पूछा, तुम जबरदस्ती गले पड़ रहे", 
"वाह! चोरी पर सीना जोरी, साथ दिया मैंने पूरा, अकेले तुम भी माल नहीं उठा सकते थे, समझे!" 
Two thief fighting before police


" अरे जाने दे जाने दे, बड़ा आया", दोनो चोरों का झगड़ा बढ़ते हुए हाथापाई की नौबत आ गई, लड़ते लड़ते वह खुद ही पुलिस के पास पहुंच गए।

(लघुकथा)

समाप्ति

पाठकों आशा है यह अंक आप सभी ने पूरा पढ़ा हो, अन्य अंक पढ़े, इसी ब्लॉग में।



©2020-2023
कॉपीराइट: सीमा शर्मा, प्राची शर्मा
सर्वाधिकार सुरक्षित।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

गांधी जयंती (क्रमशः)

बापू 

द्वितीय

बापू के प्रिय भजन**
हरि, तुम हरो जन की भीर।
द्रौपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर।
भक्त कारन रूप नरहरि, धरयो आप सरीर।
हरिनकश्यप मार लीन्हो, धरयो नाहिन धीर,
बूड़ते गजराज राख्यो, कियो बाहर नीर।
दासि मीरां लाल गिरधर, दुख जहां तहां पीर।

गांधी जी के एकादश व्रत**

जिसमे सत्य को परमेश्वर कहा, सत्य आग्रह सत्य विचार, सत्य वाणी और सत्य कर्म, अहिंसा: बिना अहिंसा के सत्य की खोज असंभव हैं, ब्रह्मचर्य: न केवल जनेन्द्रिय बल्कि सर्वेन्द्रीय पर नियंत्रण, अस्वाद: भोजन शरीर पोषण के लिए होना चाहिए, अस्तेय: (चोरी न करना) दूसरे की वस्तु लेने के अलावा आवश्यकता से अधिक संग्रह करना चोरी है, अपरिग्रह: धन संबंधी न होकर विचार और इच्छापूर्वक परिग्रह कम करना, इसके कम होने से सुख और सच्चा संतोष बढ़ता है, सेव शक्ति बढ़ती है, अभय: जो सत्यपरायण रहे वह न तो जात बिरादरी से डरे न सरकार से चोर बीमारी मौत से न डरे, न किसी के बुरा मानने से डरे, अस्पृश्यता निवारण: प्रत्येक हिन्दू का धर्म कर्तव्य हैं कि छुआछूत का निवारण करे, शरीर श्रम: बिना कारण दुसरो से सेवा न लेते हुए जिनका शरीर खुद काम ले सकता हैं, सारे काम खुद करना चाहिए, सर्वधर्म समभाव: सभी धर्मों का बराबर सम्मान करना चाहिए तथा प्रार्थना करनी चाहिए कि सभी धर्मों के दोष दूर हो जाए, स्वदेशी: अपने आसपास रहने वालों की सेवा में लीन होना स्वदेशी धर्म हैं, जो निकट के लोगो के सेवा छोड़ कर दूर के लोगो की सेवा करने दौड़ता है वह स्वदेश भंग करता हैं।

रचनात्मक कार्यक्रम

रचनात्मक कार्यक्रम को सत्य और अहिंसात्मक साधनों द्वारा पूर्ण करना स्वराज्य की रचना कहा जा सकता है। ....उसके एक एक अंग पर विचार करें।

कौमी एकता- एकता का मतलब सिर्फ राजनैतिक एकता नहीं है।.... सच्चे मानी तो हैं वह दिली दोस्ती, जो तोड़े न टूटे। इस तरह की एकता पैदा करने के लिए सबसे पहली जरूरत इस बात की है कि कांग्रेसजन, वे किसी भी धर्म के मानने वाले हों, अपने को हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, पारसी, यहूदी- सभी कौमो का नुमाइंदा समझें।

अस्पृश्यता निवारण- हरिजनों के मामले में तो हरेक हिन्दू को यह समझना चाहिए कि हरिजनों का काम उसका अपना काम है।

मद्य निषेध- अफीम, शराब, गांजा वगैरा चीजो के व्यसन में फंसे हुए अपने करोड़ो भाई बहनों के भविष्य को सरकार की मेहरबानी या मर्जी पर झूलता नहीं छोड़ सकते। इन व्यसनों के पंजे में फंसे हुए लोगो को छुड़ाने के उपाय निकालने होंगे।

खादी- खादी का मतलब है देश के सभी लोगो की आर्थिक स्वतंत्रता और महानता का आरंभ। खादी में जो चीजें समाई हुई हैं, उन सब के साथ खादी को अपनाना चाहिए। खादी के एक मतलब यह है कि हममें से हरेक को सम्पूर्ण स्वदेशी की भावना बढ़ानी और टिकानी चाहिए।

दूसरे ग्रामोद्योग- हाथ से पीसना, हाथ से कूटना और पछोरना, साबुन बनाना, कागज बनाना, दियासलाई बनाना, चमड़ा बनाना, तेल पेरना और इस तरह के दूसरे सामाजिक जीवन के लिए जरूरी और महत्व के धंधों के बिना गांवों की आर्थिक रचना सम्पूर्ण नहीं हो सकती।

गांवों की सफाई: देश मे जगह जगह सुहावने और मनभावने छोटे-छोटे गांवों के बदले हमें घूरे जैसे गांव देखने को मिलते हैं।.....हमारा फर्ज हो जाता है कि गांवों को सब तरह से सफाई के नमूने बनावें।

बुनियादी तालीम- बुनियादी तालीम हिंदुस्तान के तमाम बच्चों को, वे गांवों में रहने वाले हो या शहरों के, हिंदुस्तान के सभी श्रेष्ठ तत्वों के साथ जोड़ देती है। यह तालीम बालक के मन और शरीर दोनो का विकास करती हैं।

प्रौढ़ शिक्षा- बड़ी उम्र के अपने देशवासियों को जबानी, यानी सीधी बातचीत द्वारा सच्ची राजनैतिक शिक्षा दी जाय।

आरोग्य के नियमो की शिक्षा- हमारे देश की दूसरे देशों से बढ़ी-चढ़ी मृत्यु संख्या का ज्यादातर कारण निश्चय ही गरीबी है, जो देशवासियों के शरीर को कुरेदकर खा रही है; लेकिन अगर उनको तन्दरूस्ती के नियमो की ठीक-ठीक तालीम दी जाय, तो उसमें बहुत कमी की जा सकती है। जब बीमार पड़े तब  अच्छे होने के लिए अपने साधनों की मर्यादा के अनुसार प्राकृतिक चिकित्सा करें।

प्रांतीय भाषाएं- हिंदुस्तान की महान भाषाओं की अवगणना की वजह से हिंदुस्तान को बेहद नुकसान हुआ है, उसका कोई अंदाजा हम नहीं कर सकते।.....जब तक जनसाधारण को अपनी बोली में लड़ाई के हर पहलू और कदम को अच्छी तरह से नहीं समझाया जाता, तब तक उनसे यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वे उसमे हाथ बटायेंगे।

राष्ट्रभाषा- समूचे हिंदुस्तान के साथ व्यवहार करने के लिए हमको भारतीय भाषाओं में से एक ऐसी भाषा की जरूरत है, जिसे आज ज्यादा-से-ज्यादा तदाद में लोग जानते औऱ समझते हों, बाकी के लोग जिसे झट सीख सकें और वह भाषा हिन्दी (हिंदुस्तानी) ही हो सकती है।

आर्थिक समानता- आर्थिक समानता के लिए काम करने का मतलब है पूंजी और मजदूरों के बीच के झगड़ों को हमेशा के लिए मिटा देना।....अगर धनवान लोग अपने धन को और उसके कारण मिलने वाली सत्ता को खुद राजी-खुशी से छोड़कर और सबक कल्याण के लिए सबों के साथ मिलकर बरतने को तैयार न होंगे, तो यह सच समझिए कि हमारे मुल्क में  हिंसक और खूंखार क्रांति हुए बिना नहीं रहेगी।

किसान- स्वराज्य की इमारत एक जबरदस्त चीज़ है, जिसे बनाने में अस्सी हजार करोड़ हाथों के काम है। इन बनाने वालों में किसानों की तादाद सबसे बड़ी हैं। सच तो यह है कि की स्वराज्य की इमारत बनाने वालों में ज्यादातर(करीब ८० फीसदी)  वे ही लोग हैं, इसलिए किसान ही कांग्रेस है, ऐसी हालत पैदा होनी चाहिए।

मजदूर- अहमदाबाद के मजदूर-संघ का नाम समूचे हिंदुस्तान के लिए अनुकरणीय है क्योंकि वह अशुद्ध हिंसा की बुनियाद पर खड़ा है।... मेरा बस चले तो हिंदुस्तान की सब मजदूर संस्थाओं का संचालन अहमदाबाद के मजदूर-संघ की नीति पर करूं।

आदिवासी- आदिवासियों की सेवा भी रचनात्मक कार्यक्रम का एक अंग है ।....समूचे हिंदुस्तान में आदिवासियों की आबादी दो करोड़ है।.... उनके लिए कई सेवक काम कर रहे हैं फिर भी उनकी संख्या काफी नहीं है।

कुष्ठ रोगी- यह एक बदनाम शब्द है। फिर हममें जो सबसे श्रेष्ठ या बढ़े- चढ़े है, उन्ही की तरह कुष्ठ रोगी भी हमारे समाज के अंग हैं। पर हकीकत यह है कि जिन कुष्ठ- रोगियों को सार-संभाल कि सनसे ज्यादा जरूरत है,  उन्हीं को हमारे यहां जान-बूझकर उपेक्षा की जाती है।

विद्यार्थी- विद्यार्थी भविष्य की आशा है।....इन्हीं नौजवान स्त्रियों और पुरुषों में तो राष्ट्र के भावी नेता तैयार होने वाले हैं विद्यार्थियों को दल बंदी वाली राजनीति में कभी शामिल नहीं होना चाहिए उन्हें   राजनैतिक हड़तालें नहीं करनी चाहिए। पहनने-ओढ़ने के लिए वे हमेशा खादी का इस्तेमाल करें।

स्त्रियां- स्त्री को अपना मित्र या साथी मानने के बदले  पुरुष ने अपने को उसका स्वामी माना है। कांग्रेस वालों का यह खास कर्तव्य है  कि हिंदुस्तान की स्त्रियों का इस गिरी हुई हालत से हाथ पकड़ कर ऊपर उठावें।

गो-सेवा-  गोरक्षा मुझे बहुत प्रिय है। मुझसे कोई  पूछे कि हिंदू धर्म का बड़े-से-बड़ा ब्रह्म स्वरूप क्या है तो मैं गौ रक्षा बताऊंगा। मुझे वर्षों से  दिख रहा है कि हम इस धर्म को भूल गए हैं। दुनिया में ऐसा कोई देश मैंने नहीं देखा, जहां गाय के वंश की, हिंदुस्तान जैसी लावारिस हालत हो।

‘इस अपढ़, अनगढ़ लेकिन निश्चयी किसान ने मुझे जीत लिया.’

अपने सत्य के प्रयोग में गांधी जी ने इस पर लिखा है।***

जबरन नील की खेती कराए जाने से किसानों चंपारण, बिहार के  पश्चिमोत्तर में स्थित, किसान खाद्यान्न के स्थान पर नील के खेती को मजबूर थे, लखनऊ अधिवेशन में मिले एक किसान राजकुमार शुक्ल ने महात्मा गांधी से आग्रह किया कि वह स्वयं वहां आकर का हाल देखे, पहले इस पर प्रताप के संपादक श्री गणेशशंकर विद्यार्थी नील की खेती पर कई ज्वलंत लेख लिख चुके थे, कांग्रेस ने लखनऊ अधिवेशन में प्रस्ताव पारित किया उससे भी राजकुमार शुक्ल सन्तुष्ट नहीं हुए और गांधी जी को वहाँ स्वयं चल के जाने का आग्रह किया।

१० अप्रैल १९१७ को वहाँ पहुंचे, फिर जो हुआ वो इतिहास है, अफ्रीका में अपनाए सत्य और अहिंसा के हथियार गांधीजी ने पहली बार भारत मे प्रयोग किया, पीड़ित किसानों के बयान कलमबद्ध किये गए , ध्यान रहे इसमें कांग्रेस की सहायता नहीं ली गयी थी, जनता का जबरदस्त सहयोग था। चार माह के बाद यह रंग ले आया, और धीरे धीरे १३५ साल पुरानी नील की खेती बन्द हो गयी। 

वें जमींदार निलहे साहब के नाम से प्रसिद्ध थे। जब गांधी जी १९१७ मे वहां जांच करने गए तो उन्हें सरकारी सूचना मिली कि वह चंपारण से निकल जाए, गांधी जी ने इनकार कर दिया, अंग्रेजी सरकार ने उनपर मुकदमा चलाया, गांधी जी ने निधड़क सच कह कर स्वीकार किया कि सरकारी आदेश की जानबूझकर उन्होंने तामीली नहीं की, सरकार पर  उनके सत्याग्रह का असर हुआ और उनकी शिकायतें सुनी गई।****






                                                                                      

**गांधी डायरी, सस्ता साहित्य मण्डल

***विकिपीडिया

****भारत के गौरव (पांचवा भाग)

                                                                                       

क्रमशः......

पिछला अंक

अन्य पोस्ट

YouTube

Google News



गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

गांधी जयंती

बापू

प्रथम

गांधी जी व्यक्ति से ऊपर एक संस्था हैं, सर्वोदय के अग्रदूत गांधी जी का जन्मदिन २ अक्टूबर १८६९ को पोरबंदर में हुआ, 

गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है, उनके पिता जी का नाम करम चंद गांधी था, तथा माता का नाम पुतली बाई।

गांधी जी की आरंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई, उस समय के अनुरूप उनका विवाह १४ वर्ष की आयु में  कस्तूरबा के साथ हो गया था। वर्ष १८८८ में यह शिक्षा हेतु गांधीजी विलायत गए थे, वर्ष १८९१ में गांधी जी बैरिस्टर बन कर बम्बई लौटे थे, जहाँ वह प्रैक्टिस करने लगे, १८९३ में एक दीवानी मुकदमे में जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका गए, जिसका फैसला वर्ष १८९४ में समझौते का हुआ, वर्ष १८९५ में गांधी जी नटाल के उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए, तथा वहाँ नेटाल भारतीय कांग्रेस का गठन किया। बाल गंगाधर तिलक, एवं गोपाल कृष्ण गोखले और नेताओं से गांधी जी वर्ष १९०६ में मिले, जब वह मात्र ६ माह के लिए आये थे, उनके गतिविधियों से चिढ़े हुए अंग्रेजो ने गांधी विरुद्ध प्रदर्शन किए, इस उम्मीद में कि अंग्रेज भारतीयों के प्रति नरमी रखेंगे, वहां रहने वाले ३०० आम भारतीय ८०० बंधुआ भारतीयों जिनको गिरमिटिया कानून के बतौर गुलामी करने लाया गया था, के मदद से एम्बुलेंस सेवाओ में अंग्रेजी सरकार की बोअर युद्ध* में मदद किया।**

वर्ष १९०१ में वह राजकोट, भारत लौटकर आये तथा महामारी प्लेग से पीड़ित जगहों में जन सेवा का गठन किया, तथा दिसंबर में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में शामिल हुए। तीन माह पश्चात गांधी जी पुनः अफ्रीका लौट गए जहाँ १९०३ में उन्होंने  ट्रांसवाल ब्रिटिश इंडिया और इंडियन ओपिनियन नाम से संस्था स्थापित किया, १९०६ में हुए ज़ुलु विद्रोह जिसमे ज़ुलु के नेतृत्व ने और अतिरिक्त कर देने से मना किया था, उसी का नतीजा था, जिसमे गांधी जी ने अंग्रेजो से नेटल में रहते समय अपने द्वारा सहयोग की बात उस समय के तत्कालीन गवर्नर से की जिसे मानते हुए गांधी जी और अन्य सहयोगियों को घायल ज़ुलु लोगो की सेवा सुश्रुषा के लिए दिया गया क्योंकि गोरे सवयंसेवक इस कार्य के लिए तैयार नहीं थे, गांधी जी के व्यवहार से वह सभी बेहद प्रभावित हुए, गांधी जी लियो टॉलस्टॉय की रचनाओं से बहुत प्रभावित थे, और टॉलस्टॉय के नाम पर एक आश्रम आरम्भ किया जहां वह भारतीयों के विरुद्ध होने वाले अत्याचार पर सत्याग्रहका केंद्र  बना।

सन् १९१४ में लंदन में सरोजिनी नायडू से गांधी जी की पहली भेंट हुई जब वह उनसे मिलने गई तो उन्होंने यह देखा कि एक विश्वप्रसिद्ध नेता जो  दक्षिण अफ्रिका से अंग्रेजो से  सीधी टक्कर ले कर आ रहा है, वह काफी साधारण अवस्था मे एक लकड़ी के कटोरे में अत्यंत साधारण सा भोजन कर रहा है, तो उनकी हँसी छूट गईं, आंख उठा कर गांधी जी उन्हें देख वह भी बड़े जोर से हँसे और

 पहचान लिया।●●●

वह बाद में गांधी जी के विचारधारा में कदम कदम चलती रही तथा समर्थक रही, सामान्य घर गृहस्थी छोड़ कर भी गांधी जी के पीछे पीछे जेल गईं, जब वह जेल में नहीं होती थी तब सामाजिक कार्यों में सलग्न रहती थी।

भारत लौटे गांधी जी को सन् १९१५ में केसर-ए-हिन्द का खिताब दिया गया था, यहां से गांधी जी भारत भ्रमण पर निकले गांधी जी से तब काका कलेलकर(दत्तात्रेय बालकृष्ण कलेलकर) से और आचार्य जे बी कृपलानी(जीवतराम भगवान दास कृपलानी) से हुई, काका कलेलकर इसके पश्चात वह गांधी जी से प्रभावित हो कर साबरमती आश्रम के सदस्य बने तथा सर्वोदय में संपादकीय भूमिका निभाई। काका कलेलकर ने गांधी जी से प्रभावित हो कर अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की।**

जे बी कृपलानी, देशभक्त के साथ एक समाजवादी और पर्यावरणविद थे, तथा गांधी जी के  शिष्य और विचारों के घोर समर्थक थे।**

सन् १९१९ से गांधी जी ने पत्रिकाओं यंग इंडिया और नवजीवन का संपादन कार्य किया था। पं. जवाहर लाल नेहरू से गांधी जी पहली भेंट १९१६ में काशी विश्वविद्यालय के स्थापना अवसर के बाद कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में हुई। स्थापना दिवस पर ६ फरवरी को जहाँ गांधी जी ने भाषण दिया और बहुत ही महत्वपूर्ण विषयों पर कहा जैसे कि हिंदी भाषा के ऊपर आंग्ल भाषा भाषण के लिए चुना जाना, वाइसराय हार्डिंग के लिए चाक चौबंद सुरक्षा होना, मंदिर के आसपास व्याप्त गन्दगी, विभिन्न महाराजाओं का आकंठ सोने से लदे रहना, जो कि दरिद्रों के शोषण का पर्याय है, उन्होंने स्वयं को अराजकतावादी घोषित किया, किसानो के उठ खड़े होने से भारत को मुक्ति मिलेगी आदि।उपस्थित राजाओ ने थोड़े देर के बाद बहिर्गमन कर दिया।

 नेहरू जी को वह अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी मानते थे, नेहरू ने इस विषय मे कहा है कि उस समय गांधी जी राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रियता न दिखाते हुए  भारतीयों के दक्षिण अफ्रिकाई मुद्दों पर जुड़े रहना चाहते थे।

०० सन् १९१७ में मुजफ्फरपुर बिहार में महात्मा गांधी की भेंट डॉ० राजेन्द्र प्रसाद से हुई, वह कलकत्ता कॉलेज से विधि स्नातक तथा कलकत्ता उच्च न्यायालय में अधिवक्ता थे, उन्होंने पत्रिका साप्ताहिक बिहार विधि की नींव रखी।

 डॉ० राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष और प्रथम राष्ट्रपति थे। वैसे भारतीय संविधान में राष्ट्रपति की उम्मीदवारी के क्रम में शाश्वत उत्तराधिकारी होने में कोई बाधा नहीं है, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है, परन्तु इसमें डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने सबसे अधिक बार राष्ट्रपति बनने के बाद भी दुबारा पद में दावेदारी न रखने का उदाहरण रखा।

विचार 

सर्वोदय: इसका अर्थ सब का समान रूप से उदय हैं, यह शब्द पहली शताब्दी के जैन सन्त सुमन्तभद्र के कार्य से प्रेरित हैं, गुजराती में रूपांतरित  जॉन रस्किन के अन टू द लास्ट, "आखिरी व्यक्ति तक", से उत्प्रेरित गाँधी जी द्वारा एक फिनिक्स आश्रम स्थापित किया गया, सर्वोदय का अर्थ लोकनीति से है जो राजनीति से ऊपर रहेगा, यह एक आदर्श समाज की स्थापना करने वाला है जिसमे कोई जाति या वर्ग नहीं होगा, आधुनिक दर्शन के उलट जिसमे त्याग से ऊपर उपभोग और अधिक उपभोक्तावाद को तरजीह दी जाती हैं, गांधी जी के दर्शन सर्वोदय का कार्य शासन और आम जनता हर एक के ऊपर इस मंतव्य को और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी डालती है।

छत्तीसगढ़ में गांधी जी का प्रभाव

गोंड जाति के मांझी उपभाग की राजमोहिनी देवी इनमे से एक है, जब १९५१ के एक बहुत व्यापक भुखमरी और अकाल से क्षुब्ध यह बड़े चट्टान में आंख मूंद के बैठी थी तब इन्हें गांधी जी के विचार के प्रासंगिकता की अनुभूति हुई जिसके बाद इन्होंने २१ दिवस का उपवास किया और इसके बाद वर्षा हुई, इन्होंने बापू धर्म या सूरज धर्म की स्थापना की, इनके द्वारा स्थापित संस्था बापू धर्म सभा आदिवासी सेवा मण्डल के कार्य से इन्होंने खद्दर का प्रचार किया जो कि देशी बुनकरों द्वारा सृजन की हुई हो, मदिरापान को तम्बाकू सेवन को निषिद्ध किया गौ हत्या पर प्रतिबंध की बात कही, गांधी जी के विचारों की शिक्षाओं के प्रसार हेतु यह पैदल ही निकल पड़ी थी, इनके कार्य से जुड़ने वालो को भगत कहा जाता था।

                                                                                      

*बोअर: दक्षिण अफ्रीका के मूल डच निवासियों के वंशज थे। १८०६ में ब्रिटेन द्वारा कब्जाए जाने के बाद यह जनजातीय इलाको में पलायन कर गए और ट्रांसवाल ऑरेंज फ्री स्टेट की स्थापना की, १८६७ तक शांति रहने के बाद हीरे और सोने की खोज ने युद्ध की नींव डाली, (ट्रांसवाल: वाल नदी के उत्तर कई राज्य और प्रशासनिक संभाग आते थे, प्रिटोरिया जोहानसबर्ग) बोअर गणराज्य या ऑरेंज फ्री स्टेट क्या हैं? 

ऑरेंज एवं वाल नदी के मध्य स्थित होने से, ट्रांसवाल का अर्थ वाल नदी के उत्तर से है, या उसके पार, सन् १८९० में मामूली लड़ाई और १८९९ में पूर्ण पैमाने में युद्ध शुरू हुआ, फिर १९०० में उस पर ब्रिटेन का पूर्ण नियंत्रण आ गया, और १९०२ तक सारे विद्रोह कुचल दिए गए, तथा ३१ मई को सैन्य प्रशासन लागू कर दिया गया, सन् १९१० में नेटल एक प्रान्त था दक्षिण अफ्रीका के स्वायत्त संघ में।

                                                                                         

**संदर्भ: विकिपीडिया

•••संदर्भ: नेशनल हेराल्ड इंडिया, भारत के गौरव (आंठवा भाग)

००ब्रिटानिका

                                                                                              क्रमशः

देखिए कल, गांधी जयंती पर आगामी अंक।



महात्मा गांधी, जीवनी द्वितीय भाग












शनिवार, 15 अगस्त 2020

रायचंद, पंद्रह अगस्त पर

स्वतन्त्रता दिवस

 श्रृंखला
क्रमवार
१६०० से जो ईस्ट इंडिया कंपनी एक चार्टर के सहारे व्यापार करने आई थी, उसे १८५७ के ब्रिटिश राज के राज्य पूरे हो कर के दो टुकड़े में विभाजन करके  १९४७ में ही गई।आमतौर पर स्वतन्त्रता समर पर सभी वक्तव्य/लेख, शहादत से परिपूर्ण, और तमाम तरह की इच्छा, कई अन्य जनों की सुरक्षा, से भरपूर रहती है, यह भी कुछ इतना ही है,  ७४वें स्वतन्त्रता दिवस पर ला किले से झंडा फहराते हुए प्रधानमंत्री भाषण देंगे मगर सब कुछ मास्क नुमा दुनिया की तरह होगी सामाजिक दूरी के कड़ाई से पालन के साथ, कम मेहमान और बच्चों के बगैर पी.पी.ई. किट की सुरक्षा तले पूरी होगी, मौजूदा समय मे देशभक्ति से अर्थ देश के प्रति कृतज्ञता जताने से हैं, जो कि हम अपने कार्य:

एक तो उचित समय में कर के

दूसरे ईमानदारी से पूरा कर के आनंद ले सकते है,

कोरोना काल मे कोरोना वारियर्स पर संक्रमण के बराबर ही हमलवारों का खतरा देखते हुए धीरे-धीरे हम साल पूरा करते आ रहे है।

लाल किले में झंडा फहराया जाना देश के सभी प्रमुख स्थानों पर झंडावंदन फिर राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान, सामान्यतया बहुत से स्थानों में मिष्ठान अन्य सामग्री वितरित की जाती है, कुछ अग्रदूत ऐसे भी हैं जो दुर्गम स्थल में जाकर के भी सेवा के किसी अवसर से नही चूकते, कुछ हाथ आया मौका भी गंवा देते है, आँचलिक जगहों में आज भी झंडे का प्रथम प्रवेश भी नहीं हुआ हैं।

१५ अगस्त के अलावा एक तारीख जिस दिन इंडिया इंडिपेंडेंस बिल, १९४८, लाया जाने वाला था उसमें ३ जून अंकित था। जब जापानी सेना ने समर्पण किया था, उसी तारीख के शुभ लक्षण के कारण या सन् १९४८ तक जिन्नाह का फेफड़े के कैंसर से ग्रस्त होना था, कारण?, जिससे विभाजन में समस्या ना आये।

अट्ठारह जुलाई, उन्नीस सौ सैंतालीस, को ब्रिटिश संसद ने इंडिया इंडिपेंडेंस अधिनियम, १९४७ पारित किया ताकि भारत और पाकिस्तान बन सके, पन्द्रह अगस्त से भारतीय रियासतों पर अंग्रेजी सरकार का अधिकार खत्म हुआ और सम्पूर्ण संप्रभु शक्तियों का ब्रिटिश कॉमन वेल्थ को त्यागने समेत हस्तांतरित हुआ, और एकीकृत भारत का केंद्रीय विधान सभा भी खत्म हुआ, जिसके जगह संविधान सभा को ही कानून निर्माता माना गया, जो अब अंग्रेजो के असीम ताकतों का भी उत्तराधिकारी भी बन गयी। तथा अर्धरात्रि, १४-१५ अगस्त १९४७ को भारतीयों को उनकी स्वायत्ता सौंपी गई। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने उन अथाह संघर्षों और त्याग को याद किया, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्ताव किया कि संविधान सभा के सभी सदस्य भारत और उसकी जनता की सेवा की शपथ लेंगे।

प्रसव काल के दौरान चिकित्सीय कारण या स्वास्थ्य अलाभ की स्थिति में जच्चा बच्चा कठिनाई में आ जाते है, अब जो 'जी' जाए उसी को जीवन पर्यंत यह तारीख एन केन प्रकारेण सालती रहेगी, भारत के आजाद होते ही इस पवित्र भारतभूमि को अनन्य कष्ट हुए, उस तारीख को पीड़ित अपने कष्ट बढ़ाने वाले तो सभी प्रमुख नेता समेत आजादी के मतवाले शिरोधार्य करते है, ऐसी अबूझ मारकाट मची थी कि उसकी पीड़ा आज भी देश के अंग प्रत्यंग में विभिन्न समस्याओं के रूप में गोचर हैं।

पिछले पोस्ट में आपने पढ़ा कि सरदार पटेल पर कितने देशी रियासतों की दारोमदार थी।

जिस समय आजादी मिली गांधीजी उस समय बंगाल में जन-जन तक प्रतिघर  देश के लिए अलख जगा रहे थे। सन् १९४६-४७ में हुए साम्प्रदायिक दंगे में टीस से भर उठे उनमे से एक थे ठक्कर बापा, साम्प्रदायिक दंगे की स्थिति से व्याकुल यह ७७ वर्ष की उम्र में भी गांधी जी के पास नोआखाली दंगे शांत कराने गये।

गांधी जी के अनुयायी, पद्मभूषण मन्नतु पद्मनाभन स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम दिनों में केरल कांग्रेस का नेतृत्व करते रहे, त्रावणकोर को भारत से पृथक करने के दुस्साहस के प्रति कड़ा विरोध जताया और ६८ साल के उम्र जेल चले गये, १९४८ में यह विधान सभा के सदस्य भी रहे।

आजादी के बाद देश के सामने कई बड़ी समस्याएं आई थी, विभाजन के फलस्वरूप देश के कई भागों में हिन्दू-मुस्लिम दंगों से धरती दग्ध हो रही थी, जब हजारो के संख्या में अफसर पाकिस्तान चुन कर चले गए, तब प्रशासन की कठोर समस्या पर सरदार पटेल ने अपनी विलक्षण बुद्धि से काबू पाया उन्होंने ही भारतीय प्रशासन को इंडियन सिविल सर्विसेज के स्थान पर निर्मित किया। सरदार पटेल ने सरकारी खर्चो में ७८ करोड़ की कमी की।

स्वतंत्रता में बाधक बनने को तैयार अँग्रेजो ने मुस्लिम लीग को महत्ता देने समेत देशी रियासतों को पूर्ण स्वतंत्रता देते हुए, "जाओ तुम चाहे जहाँ" का पत्ता भी खेला, तब सरदार पटेल की अपरिमित विलक्षण बुद्धि से स्वतन्त्र होने के स्वपन्द्रष्टाओं राजा और नवाबो को भारत मे शामिल किया।

संविधान

एक संविधान किसी राष्ट्र के स्वतंत्रता का खुला समर्थक हैं।

संविधान सभा अपने शुरुआती दशा दिशा में जब इस बात पर ध्यान लगा रही थी कि संविधान के मुख्य आदर्श क्या हो? जो लोकतांत्रिक महिमा को भी खण्डित ना करे उस समय पहले ही शंका और अविश्वास की लहर चल रही थी, पिछले पोस्ट में आपने मुस्लिम लीग की भूमिका जान ही ली हैं, दिसंबर, ६, १९४६, को ब्रिटिश सरकार ने वक्तव्य दिया कि क्या यह संविधान आवाज है या देश के अनिच्छुक राज्यो पर थोपी जा रही है, जब कि यह विदित हैं, की एक विदेशी चार्टर मात्र के माध्यम से छोटे से लेकर बड़े सभी राजाओ की अंग्रेजो के समक्ष क्या स्थिति थी, अंग्रेजी सरकार की स्थिति वैसे ही जर्जर हो चुकी थी ऐसे तर्क स्वतन्त्रता हेतु एक प्रस्तावित उद्देश्य से जल्द ही सुलझा लिए गए। वही अन्य देशी रियासतों ने यह कहना शुरू जर दिया कि ये शक्तियां केवल संप्रभुता से ली जा रही हैं ना कि आम जनता से। 


विसंगतिया

वो जो लगन है, जो भारत के लिए दीवानों की टोली बन जाती हैं, जिसके लिए अनगिनत शहादतें हुई है, क्यों उसके लिए कई किस्म के कमतर शब्दो का प्रयोग, सेना के लिए, सरकारी संस्थानों/प्रतिष्ठानों के लिए, दुर्व्यवहारी होना आजकल cool बनते जा रहा है, मानो आजादी का अपशब्द कह सकने के अलावा कोई मोल नहीं हो।यहां तक कि कुछ trendy जनों और shout culture में यह कसौटी बन गई हैं, जब कि कोई भी स्वतन्त्रता जस का तस बिना किसी निर्बंधन या मनाही के नहीं है। 

Flag mini
Flag Colour


संदर्भ:- भारत के गौरव(५,८ भाग), स्व-अध्ययन

मंगलवार, 11 अगस्त 2020

Leading towards date of freedom, Lala Lajpat Rai, लाला जी

श्रृंखला

क्रमवार

पंजाब केसरी

सम्पादित:- सीमा शर्मा

"मेंरी छाती पर हुआ एक-एक वार  भारत मैं ब्रिटिश साम्राज्य वाद की काठी में एक-एक कील साबित होगी",  यह कहने वाले लाला  लाजपतराय का जन्म, २८ जनवरी, १८६५ में गाँव ढुड्ढी, ननिहाल में हुआ, कस्बा जगरांव, जिला  लुधियाना पंजाब, के व्यापार मंंडी में इनके दादा की दुकान थी और इनके पिता स्कूल में शिक्षक थे।
इन्होंने साहित्य और समाज दोनो की विद्यार्थी जीवन से ही भरपूर सेवा की, यह हिसार में ही वकालत की प्रैक्टिस करने लगे, जिसमे इन्हें इनकी प्रखर बुद्धि से और निधड़क बोलने से सफलता प्राप्त हुई,  इनके पिताजी स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुयायी थे, लाला लाजपत राय ने एक शाखा हिसार में आर्य समाज मे स्थापित की जिसका मुख्य कार्य अछूतोद्धार था, जाति के बड़े अंग को अछूत माने जाने को यह अन्याय मानते हूऐ इन्होंंने कांगड़ा और संयुक्त प्रान्त के पहाड़ी इलाके (हिमालय, शिवालिक, विध्यांचल, कैमुर) में शिक्षा का प्रचार किया, जहां इनके द्वारा दिए गए ४०,००० रुपये से पाठशालाएँ खोली गई। अंग्रेजी शिक्षा पद्धति से अप्रसन्न हो कर लाला हंसराज के सहयोग से इन्होंने लाहौर में दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज स्थापित किये, (पंजाब में आर्य समाज का सर्वाधिक विस्तार हुआ था जिसने लाला हंसराज और लाला लाजपत राय जैसे राष्ट्रवादियों को जन्मा था), यह तीन साल तक म्युनिसिपल बोर्ड में अवैतनिक मंत्री भी रहे, जहां इनके कार्य से सभी प्रसन्न रहते थे।
बंगाल मध्यप्रान्त राजपूताने में पड़े अकाल के कारण कई अनाथ बच्चों को फिरोजपुर और लाहौर के अनाथालयों में ईसाई पादरी ज़बरदस्ती धर्मांतरण करा रहे थे, अकाल पीड़ितों का पहले ही जिम्मा ले चूके लालाजी उनको अन्न पहुंचा रहे थे एवम इस अन्याय के विरुद्ध आवाज उठायी। मिंटगुमरी में हो रहे किसान आंदोलन, एक पत्रिका के संपादक को कारागार में डालने से इनका विरोध देख के छल से डिप्टी कमिश्नर ने कचहरी जाते समय इनको गिरफ्तार कर लिया।
मांडले जेल में १८ महीने रहते हुए इन्होंने महान अशोक, श्रीकृष्ण और उनकी शिक्षा, छत्रपति शिवाजी नामक पुस्तकें लिखी। 
यह उर्दू भाषा मे लिखते थे, जिसमे इन्होंने मैजिनी और गैरीबाल्डी जैसे देशभक्तों की जीवनियां लिखी, १९१४ इंग्लैंड में प्रतिनियुक्ति में जाने के बाद यह जापान गये, फिर लौटने के पहले ही महायुद्ध शुरू हुआ और भारत सरकार ने आने की इजाजत नहीं दी, जिसके बाद यह अमेरिका गए जहाँ इनकी लिखी पुस्तक यंग इंडिया सुप्रसिद्ध रही, वापस लौटने पर यह कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में यह प्रधान चुने गए, जिसके बाद यह फिर गिरफ्तार कर लिए गए जिसके बाद यह अस्वस्थ रहने लगे, इन्होंने सर्वेन्ट्स ऑफ पीपल सोसाइटी स्थापित की, लाहौर में तिलक स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स स्थापित की, सदा देशहित को सर्वोपरी मानने वाले लालाजी का निधन साइमन कमीशन का विरोध करते समय ब्रिटिश पुलिस के हिंसामय हो कर लाठी से इनके छाती में वार किया, जिससे इनको छाती में सूजन हो गयी और बुखार में इसी रोग से सन् १९२८, १७ नवम्बर को हुआ।

अन्य लेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

शनिवार, 8 अगस्त 2020

Quit India Movement

भारत छोड़ो आंदोलन

श्रृंखला(क्विट इंडिया)

क्रमवार

अनुक्रमणिका 
१ परिस्थिति द्वितीय विश्वयुद्ध  के समय की 
२ श्रीनिवास शास्त्री 
३ पट्टाभि सीतारामय्य
४ सरोजिनी नायडू 
५ पंडित रविशंकर शुक्ल
६ वल्लभ भाई पटेल 
७ प्रभाव 
८ द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत 

भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज

द्वितीय विश्व युद्ध के समय क्विट इंडिया रेसोलुशन की आवश्यकता 
भारत के सुरक्षा हेतु यह जरूरी था कि तत्काल रूप से अंग्रेज भारत छोड़ कर चले जाएं, जापानी सेना की पूर्वी भारत के सीमाओं में उपस्थिति, भारत के सुरक्षा हेतु गंभीर खतरा थी, अंग्रेजो की उपस्थिति से भारत जापानियों का निशाना बना था, यह खतरा फेरा जा सकता था यदि अंग्रेज भारत छोड़ चले जाए, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने ८ अगस्त, १९४२ को प्रस्ताव पारित किया। 
लीलनिथगो के द्वारा अपनायी जा रही दमनकारी नीति से जिसमे शीर्ष नेताओ को गिरफ्तार किया जा रहा था, जिसमे अंग्रेजी सरकार ने प्रांतीय कोंग्रेस समिति को अवैधानिक घोषित किया जाना था से भारतीय समुदाय में भीषण असंतोष को जन्मा एक सप्ताह तक श्रमिक और कामगारों द्वारा उद्योगों से, मिलो से, कारखानों से हड़ताल प्रदर्शन किया गया।

भूमिका

भारत पर शासन को और अधिक सुलभ बना देने के लिए अंग्रेजीदां सरकार ने भारत सरकार अधिनियम १९३५ पारित किया, अप्रैल १९३६ के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस ने इसे अस्वीकार्य बताया, सर सी.वाय चिंतामणि जैसे उदार वादी नेताओ ने भी इसे भारतीयों के विरुद्ध कहा था, कांग्रेस का मानना था कि ऐसे संविधान का क्या लाभ जो वयस्क मताधिकार से निर्मित न हो या उसके समकक्ष न हो? हालांकि फरवरी में हुए १९३७ के चुनाव में न केवल हिस्सा लिया बल्कि पूर्ण बहुमत प्राप्त की, १९३७ में ही बर्मा को अंग्रेजों ने पृथक कर दिया, मद्रास, केंद्रीय प्रान्तों, एवं बिहार ओडिसा के संयुक्त प्रांतों में बहुमत में रही, बॉम्बे, बंगाल, असम, उत्तर पश्चिम सीमांत प्रान्तों में तथा सिंध एवं पंजाब छोड़ कर सभी जगह एकमात्र उदघोषित पार्टी बन कर उभरी, वही मुस्लिम लीग को एक भी स्थान प्राप्त नहीं हुआ, जीत कर भी कांग्रेस ने कार्यालयों को ग्रहण कर के मंत्रिमंडल बनाने से यह कहते हुए इंकार किया की उन्हें तत्कालीन वाइसराय लीलनिथगो से आश्वासन चाहिए कि उनके गवर्नर जनरल उनके दैनन्दिन कार्यो में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे,  ऐसी आश्वासन मिलने के बाद ये कार्यालय ग्रहण किये गए, और मंत्रीमण्डल बनाये, जो अनवरत रूप से दो वर्षों तक चला, द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रारम्भ होते ही सेप्टेम्बर १९३९ में भारत को अंग्रेजो ने युद्धरत देशों में शुमार कर लिया,  कांग्रेस ने उचित शब्दो एवम प्रकार से इसका पूर्ण विरोध किया, जिसके फलस्वरूप पंजाब के और सिंध के प्रान्तों के अलावा ८ प्रान्तों से इस्तीफा दिया, जिसे मुस्लिम लीग ने तीन रुचार पुस्तिका बांट कर मुक्ति दिवस के रूप में मनाया साथ ही साथ आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने क्षेत्रों में मुस्लिमो से सौतेला व्यवहार करती थी, कांग्रेस ने युद्धोन्माद में लिप्त किसी भी कार्य को बढ़ावा देने से इनकार किया और कहा वह साम्राज्यवाद या विस्तारवाद को बढ़ावा देने की नीति का भरपूर विरोध करती है, जिसके बाद मार्च, १९४० में लाहौर अधिवेशन में जिन्नाह ने दो राष्ट्र की नीति का पटाक्षेप किया, तथा हिंदुस्तान और इस्लाम की भिन्न बताया, बेहद आहत इस वक्तव्य से गांधी जी मे कहा कि ऐसी स्वतंत्रता नहीं चाहिए जो अंग्रेजो के छोड़े हुए भग्नावेष से मिले, तथा अब युद्ध की स्थिति में स्वतंत्रता प्रदाय किये जाने के वचन से भारत सहयोग करेगा।

यूरोप में युद्ध की बढ़ती हुई गम्भीरता को देखते हुए भारतीय संसाधनों के अधिकाधिक उपयोग के लिए एकतरफा बनाया गया अगस्त प्रस्ताव ८ अगस्त १९४० को आगे रखा। जिसमे यह कहा गया कि कार्यकारिणी परिषद  तथा युद्ध  हेतुक के परामर्श परिषद के गठन के अंतरिम उपाय को न रोका जाए, जहां राष्ट्रीय जीवन खुद युद्ध के संघर्षों में ग्रस्त है, संवैधानिक उपबंधों की समीक्षा नहीं कि जा सकती, तथा युद्ध के पश्चात संविधान सभा का गठन भारतीय संविधान के लिए किया जाएगा और किसी समझौते के जो संविधान सभा गठन में सहयोग करे का वह स्वागत करते हुए प्रतिसहयोग करेंगे, रक्षा समझौते को ध्यान में रखते हुए, भारतीय राज्यों से संधि अनुरूप उनके स्वयं के आर्थिक, राजनैतिक एवं सामाजिक संरचना के अनुरूप स्वयं के संविधान रचना करने के अधिकार को सुरक्षित किया।

मुस्लिम लीग के तुष्टिकरण हेतु ऐसे किसी भी संविधान को नकारने का संदेश दिया जो किसी इतने प्रभुत्व व बहुतायात समुदाय के हितों की रक्षा नहीं करेगी, या आहत करती है। तब, महात्मा गांधी ने कहा था कि तत्कालीन समस्या स्वतंत्रता की नहीं बल्कि जीने के अधिकार की है, यथा आत्म अभिव्यक्ति की।

१६ सिंतबर १९४० के प्रस्तावना में कांग्रेस ने अपने युद्ध संबंधी सहयोग के वचन को अस्त होने बताया,

१७ अक्टूबर १९४० को सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारम्भ किया।

क्रिप्प्स मिशन के असफलता के बाद गोवालिया टैंक मैदान में गांधी जी ने भाषण दिया अगस्त १९४२ में कांग्रेस ने गांधी जी के सुझाव पर प्रसिद्ध भारत छोड़ो का प्रस्ताव पारित किया यूसुफ मेहर अली का दिया नाम क्विट इंडिया गांधी जी को पसन्द आया यूसुफ मेहर अली ने इस नाम से किताब भी प्रकाशित की, क्विट इंडिया का मतलब था अंग्रेज तुरंत भारत से चले जाएं नही तो बहुत जबरदस्त आंदोलन छेड़ दिया जाएगा सवेरे ही सब नेताओ को अंग्रेजो द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया, पर आंदोलन तेजी से चलता रहा, करो या मरो का नारा गांधी जी ने ही इस समय दिया था, दूसरे दिन बम्बई में पूरी हड़ताल हो गयी, सारे शहर में इतने बड़े नेताओं की गिरफ्तारी से रोष फैल गया। इसे अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है, जिसके बाद प्रदर्शनों का जोर चला, मन्त्रणा, बैठक, हड़ताल, जुलूस की बहार आ गई, अंग्रेजी सरकार की नींव ही हिल गई थी, मगर यह विरोध का भी लाठीचार्ज, गोलीबारी, सम्पत्ति जब्त करने से, गिरफ्तारी से दमन किया, जनता ने इसमें कई डाकखाने, म्युनिसिपल सम्पत्ति,रेलवे, पुलिस स्टेशन्स भी ध्वस्त कर दिए, इस समय अंग्रेजी सरकार ने अखबारों को नियंत्रित करने के लिए निषिद्ध किया गया, इससे अंग्रेजी सरकार को आमजनता की ताकत का अहसास हुआ।

सितम्बर, १९४२, में विस्फोटक पुलिस पर फेके गए, १९४४ में महात्मा गांधी को मुक्त किया गया, जिससे इस आंदोलन ने ऊंचाई खो दी।

कई नेता जो इसमें गांधी जी के साथ थे उनमे से एक थे।

श्रीनिवास शास्त्री 



सन् १९४२ के भारत छोड़ो आंदोलन के समय उन्होंने इस बात और जोर दिया कि महात्मा गांधी आदि कांग्रेस नेता ही देश के वास्तविक नेता है, और ब्रिटिश सरकार को उन्ही से राजनीतिक समझौता करना चाहिए, क्रिप्प्स मिशन के केंद्र में भी इनका यही मत था। यह सिद्धान्तवादी राजनीतिज्ञ श्रीनिवास शास्त्री की रामायण में आस्था थी जिसकी उन्होंने ३० व्याख्यान दिए, और वह अब प्रकाशित है,उनका मत था की रामायण के प्रचार से राष्ट्र कल्याण अधिक हो सकता था।

पट्टाभि सितारामय्य



अखिल भारतीय देसी राज्य प्रजा परिषद के १९४६ से १९४८ तक रहे अध्यक्ष और गाँधीज्म एंड सोशलिज्म के लेखक डॉ० सीतारामय्य १९२० में  गांधी जी के प्रभाव में आये, मार्च १९४२ के क्रिप्प्स मिशन को देशी रियासतों के समस्याओं से स्टैनफर्ड क्रिप्प्स को अवगत कराया, भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने से यह जेल में डाल दिये गए, डॉ० पट्टाभि भारत के संविधान सभा मे चुने गए थे,

सरोजिनी नायडू 



गोल्डन थ्रेशहोल्ड, बर्ड ऑफ टाइम, ब्रोकन विंग की कवियत्री, भारत कोकिला, गांधी जी से प्रभावित थी, वह कई बार जेल गयी, आखिरी बार भारत छोड़ो आंदोलन के समय जेल जाने के बाद तीन साल बाद अन्य नेताओं के साथ मुक्त हुई।

पंडित रविशंकर शुक्ल

 ने  छत्तीसगढ़ से भारत छोड़ो आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई, अधिक पढ़ने के लिए:-

 .पं० रविशंकर शुक्ल

वल्लभ भाई पटेल



८ करोड़ ६५ लाख, ५ लाख वर्गमील के ५६२ देशी रियासतों को जोड़ने वाले, सरदार पटेल को भारत छोड़ो आंदोलन में जुड़ने से वल्लभ भाई पटेल गिरफ्तार किए गए जहां उन्हें १५/०६/१९४५ को अन्य नेताओं के साथ मुक्त किया गया।

स्वतंत्रता के बाद सूचना प्रसारण विभाग के सदस्य, और भारतीय रियासतों का विभाग से सम्भाला, जिसके बाद वह उपप्रधानमंत्री रहे।

★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★

दूसरी विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप राजनीतिक संसार मे उथलपुथल मचा दिया, विश्व को दो बड़ी शक्तियों का प्रादुर्भाव देखने को मिला जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ समाजवादी गणराज्य आते है, कई राज्यो ने समाजवाद अपनाया, और साम्राज्यवाद के सेना और शक्ति का हास् हुआ, अब ब्रिटेन मात्र ही शक्तिशाली नहीं था, जिसके बाद उदार वामपंथी विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टी है, १९वीं सदी के पूर्वार्ध में, मजदूर संगठनो, समाजवादी राजनीतिक दलों के उठाव के साथ हुआ। इंग्लैंड के सामान्य चुनाव कंज़र्वेटिव पार्टी और लेबर पार्टी के मध्य हुई जिसमें लेबर पार्टी की जीत हुई।

मुस्लिम लीग के मो० अली जिन्नाह ने इसे हिन्दू राज के लिए लक्षित बताया, की यह न केवल अंग्रेजों के विरूद्ध हैं, बल्कि यह मुस्लिम पक्ष का दमन करेगी, यह भारत के मुस्लिम पक्ष के लिये घातक है, जिससे इस के अखिल भारतीय मुस्लिम लीग समिति ने सम्मेलन कर कहा कि वह सभी ऐसे किसी भी कार्य, जो कांग्रेस द्वारा प्रायोजित है से दूर रहे जिसमे यह अंग्रेजी सरकार से कहा कि यह बंटवारा कर के भारत छोड़ दे, कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अंग्रेजी सरकार का साथ दिया, इन विभिन्न कारणों से यह आंदोलन अपने सम्पूर्ण लक्ष्य को ग्रहीत नहीं कर पाई।
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक रुपये का सिक्का क्विट इंडिया आंदोलन के प्रतीकात्मक जारी किया था।
फन फैक्ट:- चाचा चौधरी का ट्रक डग डग दूसरे विश्व युद्ध के समय का है जब उसे जापानी बर्मा के सीमा में छोड़ गए थे तब उसे चाचाजी(चौधरी) ने अंग्रेजो से खरीद लिया था।

सन्दर्भ:- भारत के गौरव कक्षा आठ के आई. सी. एस. ई, के इतिहास की किताब एवं विषय:- विधिक और संवैधानिक इतिहास- Dr. Paranjape
चाचा चौधरी कॉमिक्स
Quit India Movement
Facebook link:- @Myblogs.Seema
अन्य रोचक लेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

सोमवार, 3 अगस्त 2020

संबोधन सनातन धर्म में

ब्रह्मवैवर्त पुराण 

सामान्य परिचय
अनुक्रमणिका 

१ स्रोत

२बालक/बालिका  के लिए 

३ पिता /माता के लिए 

४ स्त्री के लिए  

५पुरुष के लिए 

६अपने सम्बन्धियों को 

७ मान्यता 

८ मित्रता कैसी होनी चाहिए 

ब्रह्नमवैवर्त पुराण में वर्णित

बालक/बालिका के लिये

पिता को
• तात
• जनक
माता(गर्भधारिणी)
• अम्बा
• जननी
• प्रसु
पिता के पिता को
• पितामह
पितामह के पिता को
• प्रपितामह
अन्य को सगोत्र
माता के पितामह को
• मातामह
मातामह के पिता को 
• प्रमातामह
प्रमातामह के पिता को
• वृद्धमातामह
पिता की माता
• पितामही
 पिता की पितामही(पितामही की सास)
• वृद्धप्रपितामही
माता की माता
• मातामही
(माता के समान ही पूजित होती हैं।)
प्रमातामह की पत्नी 
• प्रमातामही
प्रमातामह के पिता की पत्नी 
• वृद्धप्रमातामही(प्रमातामह की माँ)
पितृव्य
• ताऊ, चाचा
माता के भाई को
• मातुल(मामा)
पिता की बहन को
• पितृष्वसा (फुआ)
माता की बहन को
• मातृष्वसा(मासुरी या मौसी)

पिता/माता के लिये

बेटे को
• सुनु, तनय, पुत्र, दायाद, आत्मज
बेटी को
• दुहिता, कन्या, आत्मजा
पुत्र की पत्नी
• वधु(बहु)
पुत्री का पति
• जमाता(दामाद)

स्त्री के लिये

पति के अर्थ में
• प्रिय
• भर्ता
• स्वामी

 पुरुष के लिये

पत्नी के अर्थ में
• भार्या
• जाया
• प्रिया
• कांता

स्त्री के लिए 

पति के भाई को
• देवर
पति की बहन को
• ननान्दा(ननद)
पति के पिता को
• श्वशुर
पति की माता को
•  श्वश्रु
पत्नी के भाई
• श्यालक
पत्नी की बहन
• श्यालिका
पत्नी के पिता को
• श्वशुर

अपने सम्बन्धियों को 

सगे भाई को
• सोदर
सगी बहन को
• सोदरा या सहोदरा
बहन के बेटे को
• भगिनेय(भगिना या भांजा)
भाई के बेटे को
• भ्रातृज(भतीजा)
बहनोई को
• आबुत्त(भगनिकान्त, भागिनिपति)
साली का पति
• साढ़ू(भाई, क्योंकि दोनों के ससुर एक ही है)

मान्यता 

श्वशुर को पिता ही जानना चाहिए(पत्नी/पति का पिता)
मनुष्यो के पांच पिता कौन हैं
• अन्नदाता
• भय से रक्षा करने वाला
• पत्नी/पति का पिता
• विद्यादाता
• जन्मदाता
चौदह माताएं
• अन्नदाता की पत्नी
• बहन
• गुरुपत्नी
• माता
• सौतेली माता(विमाता)
• बेटी
• बहु
• मातामही
• पितामही
• श्वश्रू
• माता की बहन
• पिता की बहन
• चाची
• मामी
पुत्र के पुत्र को
• पौत्र, उसका पुत्र
• प्रपौत्र, उसका पुत्र
• वंशज, कुलज
कन्या के पुत्र
• दौहित्र,उसके पुत्र
• बांधव
गुरुपुत्र तथा भाई
• पोष्य एवम परमबांधव
गुरुपुत्री तथा बहन
• पोष्या(मातृतुल्य)
पुत्र के गुरु को 
• भ्राता, पोष्य, सुस्निग्ध माना जाता है
पुत्र के श्वशुर
• भाई, या वैवाहिक बंधु, बेटी के श्वशुर को भाई या वैवाहिक बन्धु माना जाता है
गुरु और श्वशुर के भाइयों का सम्बंध गुरुतुल्य हैं।
जिसके साथ बंधुत्व( भाई से व्यवहार) हो वह मित्र हैं, 

मित्रता कैसी होनी चाहिए 

मित्र कौन है
• जो सुख देने वाला हो
शत्रु कौन हैं
• जो दुख देने वाला है
मित्रता का सम्बंध प्रीतिजनित है, वह परम् दुर्लभ है, मित्र की माता मित्र की पत्नी ये माता तुल्य है। मित्र के भाई और पिता मनुष्यों के लिए चाचा और ताऊ के समान आदरणीय माने जाते हैं।


सन्दर्भ:- कल्याण वर्ष ३७, संख्या १, ब्रह्मवैवर्त  पुराण अंक
Facebook link : Seema Sharma As Blogger

शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

गोष्ठी- प्रेमचंद, Munshi Premchand

व्यक्तित्व

प्रेमचंद

सम्पादित: सीमा शर्मा

कोई ज्वलन्त समस्या हो या आमूलचूल बदलाव, जिस पेशिनगोई ने पहले ही अपनी कह दी हो वह है प्रेमचंद, भारत के गौरव में एक पाठ इनके जिंदगी पर है, एक हिंदी पाठ मेरे स्कूल की किताब में थी, प्रेमचन्द, एक ऐसे दिया रहे है जिसकी बाती तो काफी लंबी थी पर जलने को तेल कम था।
प्रेमचंद को पढ़ने के बाद जब बाकी की दुनिया की ओर देखती हूँ तो सारी दुनिया ही उनसे मोहग्रस्त मालूम पड़ती हैं।
पहले पाठ्यक्रम फिर दुनिया में इन कहानियों को पढ़ा जाता है, वैसे, काफी हद तक ये सम्पादित कर दिये जाते है। इनकी पहली कहानी 'पंच परमेश्वर' है। और अंतिम कफ़न, सामाजिक सरंचना इंगित करती हुई नमक का दरोगा, बड़े घर की बेटी, रानी सारंध, आत्माराम, दुर्गा का मंदिर, वज्रपात, पूस की रात, लाल फीता या मजिस्ट्रेट का इस्तीफा आदि कहानियां , यह उपन्यास मंगलसूत्र लिख ही रहे थे, पर यह अपूर्ण रह गई।


उत्तर प्रदेश में काशी से चार मील दूर लमही में ३१, जुलाई, १८८० को धनपत राय, अजायब लाल, जो डाकखाने में क्लर्क थे के घर जन्में थे, इन्होंने बी.ए., तक कि शिक्षा प्राप्त की यह वकालत भी पढ़ना चाहते थे, इनकी शादी १३-१४ वर्ष में हो गईं थी, वह इनसे उम्र में भी बड़ी थी, पति से भी झगड़ा करती थी और सास से भी, इस लिए ये शादी अधिक समय तक टिक नहीं पाई, और दूसरी शादी शिवरानी देवी से, कुछ बहुत जानी जाने वाली बातों में बाल्यकाल में माता की मृत्यु, विमाता से क्षोभ और उनके पुत्र के स्वयं काबिल होने तक उन दोनों की जिम्मेदारी उठाने की, या एक बाल-विधवा, से पुनर्विवाह की अथवा कई पत्रिकाओं के सम्पादन की जिसमे माधुरी और हंस आते है,  गांधीजी के गोरखपुर में दिए भाषण से असहयोग में सहयोग हेतु न केवल सरकारी नौकरी से त्यागपत्र बल्कि देशप्रेमियों को अपने घर मे एक मिलने के लिए विश्वासप्रद स्थान देना,  हालांकि इनकी एक पांच कहानियों का संग्रह सोजेवतन, अंग्रेजो ने ज़ब्त की बस देशप्रेम में जेलयात्रा की इनकी इच्छा अधूरी रह गई।  इनकी उन्नति की असीम अभिलाषा गांव के उन्नति से शुरू होती है, और वह समाजवादी विचारधारा के पुजारी थे, दरिद्रता, भूख, अशिक्षा, रूढ़िवादिता, सामाजिक शोषण, अंध विश्वास, और बेचारगियों को साहित्य में पिरोना, अब सभी ही प्रशंसको को कंठस्थ है, 'निर्मला', 'गोदान','कर्मभूमि', रंगभूमि', प्रेमाश्रम(हिंदी का पहला राजनीतिक उपन्यास)
इनके चाचा इनको प्यार से नवाब कह के बुलाते थे इसलिए शुरुआत में नवाब राय के नाम से यह रचना करने लगे, पर परतंत्रता के जमाने मे अंग्रेजो को यह रास नहीं आया, कालांतर में यह प्रेमचंद के नाम से रचना करने लगे, जहाँ कुछ रचनाओं पर फिल्में बनी है, फ़िल्म देवदास से मुतास्सिर, सेवासदन को फिल्माने यह बम्बई गये थे, पर बात नहीं बनी। दूसरी कहानियों पर जो फ़िल्म है वह निरूपा राय, बलराज साहनी की  सन् १९५९ की हीरा-मोती है जो दो बैलो की कथा पर आधारित है, १९६३ की राजकुमार और कामिनी कौशल की गोदान जो मुख्य रूप से उपन्यास गोदान पर आधारित हैं, १९६६ की सुनील दत्त की ग़बन, १९७७ की अमजद खान, सईद जाफरी, संजीव कुमार शबाना आजमी से सजी शतरंज के खिलाड़ी, १९८१ की सदगति, या दूरदर्शन में गोदान, निर्मला, ईदगाह, बूढ़ी काकी, नमक का दरोगा, सवा सेर गेहूँ के नाट्य रूपांतरण।
                        रचना जितनी रच बस जाती है, पढ़ने का उतना ही जी करता है, सभी किस्म के चित्रण का दर्पण कोई बचपन का अनूठा किस्सा, कहीं इतना स्वच्छंद पात्र जो खाक में मिलने के बाद भी ना मिले या ऐसे बंधे पात्र जिसका जन्म जन्मांतर से मौत से कोई लेना-देना नहीं हो, ये कालजयी रचना युवा पीढ़ी की "मिस पद्मा", हो या किशोरवय की "जादू", या धार्मिक उन्माद के चलन "हिंसा परमो धर्म:",  आज के बढ़ते चलन और कदम की तरह बासी भात में खुदा का साझा", जिससे आज सभी एकमत रहते है कि यह तो राजस्व का जरिया है और किसी लती की आदत की, उस मदिरा पर ना जाने कितने ही क्रांति करने वाले ब्रह्मा, ८ अक्टूबर, १९३६, को खुद के जिंदगी में सेहत से हार गए।






अन्य रोचक लेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

रायचंद- हिंदी भाषा मे मुहावरे और लोकोक्तियां, proverbs and maxims in hindi, Hindi bhasha ke muhavare aur lokoktiya

■मेरे विचार में◆◆

संपादित:सीमा शर्मा

अनुक्रमणिका 

१ परिचय 

२मुहावरे 

३ उनके अर्थ 

४उनके प्रयोग 

५ लोकोक्ति 

६ उनके अर्थ 

७ उनके प्रयोग 


सामान्य आचरण व्यवहार के लिए भाषा शब्दो एवं वाक्य में ,बोली शब्दो एवं वाक्यो का विशेष उच्चारण या   सांकेतिक भाषा का आमजन प्रयोग करते है। भाषा का उपयोग आपसी संवाद, प्रश्नोत्तरी, वक़्ता, उद्देशयित तक संदाय करने के लिए, स्वयं के विचार रखने के लिए , विचारधारा का समुचित प्रचार करने के लिए , भाषा का आधुनिक भाषाशैली में अधिकाधिक प्रयोगात्मक उपयोग स्तर उत्थान के लिए अवश्यम्भावी है। जैसे लिखकर के किसी साहित्यिक रत्न में पिरोना अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। आधुनिक समय में कई सोशल मीडिया साइट पर या मंच पर भाषा का सामान्य स्तर या यूं कहें सभ्यता का स्तर गिरता जा रहा हैं, आवश्यक यह है, की पाठक स्वयं आत्मविलोकन करके अपने अच्छे बुरे पर विचार करे।
विभिन्न मुहावरे, Hindi Proverbs

जो बात चित्त को प्रसन्न करने वाली न भी हो तो उसे मुहावरे या लोकोक्ति के माध्यम से कहने से भी उद्देश्य की पूर्ति होती है,   कटाक्षपूर्ण या व्यंग्यात्मक शैली में भी इनका प्रयोग उचित है।
हिंदी लोकोक्तियाँ

मुहावरे(मूलतः अरबी परंतु हिंदी में प्रयोग समुचित, वाक्यांश)

उदाहरण :-  

               १.औंधी खोपड़ी का होना

अर्थ:- मूर्ख होना
प्रयोग:- औंधी खोपड़ी के व्यक्तियों को समझाना समय व्यर्थ करना हैं।

                 २.      अंधे की लकड़ी

अर्थ:- एक मात्र आश्रय
प्रयोग:-  प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपभोग करने के पश्चात मनुष्य के पास  केवल जीर्णोद्धार ही अंधे की लकड़ी प्रमाणित होगी।

                 ३. अपना राग अलापना

अर्थ:- अपनी ही बात कहना
प्रयोग:- आजकल के राजनीतिज्ञ जनता की बात नही सुनते केवल अपनी ही राग अलापते रहते है।

                  ४. अंधे को दीया दिखाना

अर्थ:- व्यर्थ के काम करना
प्रयोग:- आलसी को काम के अनुभव देना अंधे को दिया दिखाना हैं।
                 ५. अंग अंग ढीला होना
अर्थ:-थक जाना
प्रयोग:- जेठ की गर्मी और ऊपर से पानी की कमी ने खेती किसानी करने वालो का अंग अंग ढीला कर दिया हैं।
                 ५. आस्तीन का सांप
अर्थ:- मित्रता के आड़ में छल
प्रयोग:- भ्रष्टाचार करने वाले आधुनिक युग में राष्ट्र के लिए आस्तीन के सांप हैं।
                ६.उन्नीस बीस का अंतर
अर्थ:- बहुत कम अंतर
प्रयोग:- उन्नीस बीस का अंतर बता कर बहुत से लोग असली सामान के बदले नकली क्रय कर देते है।
                 ७. खाला जी का घर
अर्थ:- आसान काम
प्रयोग:- कानून का सख्ती से पालन आपराधिक मानसिकता के असर को खाला जी का घर बनने से रोकता हैं।
                ८. घड़ो पानी भर जाना
अर्थ:- अत्यंत लज्जित हो जाना
प्रयोग:- चोरी करते रंगे हाथ पकड़े जाने पर उसे घड़ो पानी भर गए।
               ९. कलेजे पर सांप लोटना
अर्थ:-ईर्ष्या से दुखी 
प्रयोग:- विजेता के घोषित होते ही निश्चय ही कइयों के कलेजे पर सांप लोटने लगेगा।
               १०. कोल्हू का बैल
अर्थ:- दिन रात काम करना
प्रयोग:- घड़ी के कांटे कोल्हू के बैल की तरह समयचक्र पूरा करते रहते है।
               ११.चोली दामन का साथ
अर्थ:- दृढ़ संबद्धता
प्रयोग:- अंधेरे और रात का चोली दामन का साथ है।
               १२. नौ दो ग्यारह होना
अर्थ :- भागना
प्रयोग:-हेडमास्टर की कड़क स्वर से शोर करते बच्चे नौ दो ग्यारह हो गए।
               १३. बहती गंगा में हाथ धोना
अर्थ:- मौके का लाभ 
प्रयोग:-  सामयिक प्रसंग में उपस्थिति दिखा कर प्रबुद्धजन बहती गंगा में हाथ धो लेते है।
              १४.राई का पर्वत बनाना
अर्थ:- छोटी सी बात को बढ़ा कर कहना
प्रयोग:- बातूनी लोग राई का पर्वत बनाने में माहिर होते है।
              १५.घी के दिये जलाना
अर्थ:- खुशी मनाना
प्रयोग:- गांव में पहली बार चिकित्सालय के खुलने पर ग्रामीणों ने घी के दिये जलाये।
               १६. दौड़ धूप करना
अर्थ:- बहुत प्रयत्न करना
प्रयोग:- धुन होकर जीवन भर दौड़ धूप करने के बाद  आज अब आराम करने की बारी आई है।
               १७. भीगी बिल्ली बनना
अर्थ:-  भय में आना
प्रयोग:- सच सामने आने पर आरोपी भीगी बिल्ली बन गया।
               १८. पत्थर का कलेजा होना
अर्थ:- कठोर हृदय
प्रयोग:- पत्थर का कलेजा कर के कई अभिभावक छात्रों  को पैतृक स्थान  से  उच्च अध्धयन करने  विदेश भेजते है।
              १९. दांत खट्टे करना
अर्थ:- बुरी तरह से परास्त करना
प्रयोग:-  एक छोटी चींटी भी हाथी के सूंड में घुस कर हाथी के दांत खट्टे कर सकती है।
             २०. इति श्री करना
अर्थ:- सम्पति
प्रयोग:- पाठ्यक्रम पूरा होते ही शिक्षक महोदय ने छात्रों को पढ़ाने से इति श्री कर ली।

                                     ◆◆◆लोकोक्ति◆◆◆

यह पूर्ण वाक्य कहलाते है, उक्तियां जो जन प्रसिद्ध है। यह स्वतंत्र वाक्य है।
उदाहरण:-
             १. आंखों का अंधा नाम नयन सुख
अर्थ:- नाम के प्रतिकूल 
प्रयोग:- हमारे कॉलोनी के एक व्यक्ति का नाम यो तो सखाराम है पर है पर उसके किसी से बनती नहीं, ठीक ही है आँखों का अंधा नाम नयनसुख।
             २. चोर-चोर मौसरे भाई
अर्थ:- दो  लोगो मे एक समान अवगुण होना
प्रयोग:- अधिवक्ता ने पकड़े गए दोनो आरोपियों को अपराधी प्रमाणित करने के लिए उन दोनों को चोर-चोर मौसेरे भाई की संज्ञा दी।
             ३. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत
अर्थ:- सही समय मे कार्य ना करना और नुकसान के ऊपर बाद में पछताना
प्रयोग:-  सही समय मे समस्या का समाधान ना करना आज हेडमास्टर को भारी पड़ा तब प्रधानाध्यापक ने कहा अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत।
             ४.उल्टे बांस बरेली को
अर्थ:- अपरंपरागत कार्य
प्रयोग:-  पहले ही गिरती स्थिति में स्थानीय  वस्तुओ को बढ़ावा न देते हुवे विदेशी वस्तुओ के संचार, उल्टे बांस बरेली को चरितार्थ करती है।
             ५. दिया तले अंधेरा
अर्थ:- किसी ऐसी वस्तु जिस के पास अन्य चीज़ों की जानकारी है परंतु वह स्वयं के स्थिति के साथ अनभिज्ञ है
प्रयोग:- मास्टरजी के पुत्र के  उन्ही के विषय के परीक्षा  में असफल रहने पर मास्टरजी ने कहा उन्होंने दिया तले अंधेरा को चरितार्थ कर दिया।
              ६. ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी
अर्थ:- काम ना करने का बहाना
प्रयोग:-  एन समय में कामगार ने कुछ अपरिहार्य शर्त रख दिये तो ठेकेदार ने कहा ये तो ऐसा है ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी।
               ७.हाथ सुमिरनी बगल कतरनी
अर्थ:- छलपूर्ण व्यवहार करना
प्रयोग:- साथ सफर करने के बहाने से भेष बनाये डाकू ने लूटने की योजना जाहिर कर लोगो को लूट लिया। सही ही है हाथ सुमिरनी बगल कतरनी।
               ८.हंसा थे सो उड़ गए, कागा भये दीवान
अर्थ:- किसी अच्छे व्यक्ति के स्थान पर दुर्जन को अधिकार मिलना
प्रयोग:-  लाभप्रद पदों पर अशिक्षितों की नियुक्ति और  शिक्षितो का बेकार रहना, हंस थे सो उड़ गए, कागा भये दीवान को चरितार्थ करती है।
              ९.सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है
अर्थ:-  कोई कमी ना होने पर बाकी सभी को भी उसी स्तर का समझना
प्रयोग:- मंदी काल में कई के पास सामान्य खर्चे चलाने के लिए धन नहीं है और तरह तरह के  महंगे विज्ञापन देख  कर के मन से निकलता है सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता हैं।
             १०. हर्रा लगे न फ़िटकरी रंग चोखा आये
अर्थ:- मुफ्त में काम होना
प्रयोग:- कामगारों को एक काम के लिए बुला के सेठ जी अपने अधिकाधिक काम करा लेते है यह देख के मुनीमजी ने कहा हर्रा लगे ना फ़िटकरी रंग चोखा आये।
              ११. आधी छोड़ पूरी को धावै, आधी रहे न पूरी पावै
अर्थ:- लालच के कारण हाथ आयी वस्तु गवाना
प्रयोग:- शेर ने पहले खरगोश को पकड़ा फिर दूर से हिरण को देख कर खरगोश को छोड़ दिया, हिरण पहले ही सतर्क हो कर कुलांचे भरता चला गया और खरगोश चपलता से वहां 
छुप गया। ठीक ही है ,आधी छोड़ पूरी को धावै, आधी रहे न पूरी पावै।
               १२.कोउ नृप होइ हमे का हानि
अर्थ:- ऊंचे पद पर कोई भी आसीन हो 
प्रयोग:-  राजनीतिज्ञों से अविश्वास के कारण अब तो आम जनता कहने लगी है कोउ नृप होइ हमे का हानि।
              १३.आम के आम गुठलियों के दाम
अर्थ:- दोहरा लाभ
प्रयोग:- गाय पालन करने से  दूध समेत गोधन भी सुलभ होता है, इसे कहते है आम के आम गुठलियों के दाम।
             १५. एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा
अर्थ:- एक बुराई के पैरोकार होने के बाद कोई और बुराई का काम करने लगना
प्रयोग:- छात्र जीवन में पढ़ाई से जी चुराना तो सामान्य बात है पर साथ ही साथ गलत संगत होना एक तो करेला दूजे नीम चढ़ना जैसा हैं।
            १६. ओखली में सिर दिया तो मूसल से क्या डर।
अर्थ:-  कठिन काम आरम्भ करके बाधाओं से डर क्या।
प्रयोग:- एक बार पढ़ाई के लिए कमर कस लिए तो कठिन प्रश्नों से क्या घबराना, आखिर ओखली में सिर दिया तो मूसल से क्या डर।
            १७.जिसकी लाठी उसकी भैंस
अर्थ:- बलवान का अधिकार स्थापित करना आसान होता है
प्रयोग:- बलप्रयोग से नेताजी ने अपने छोटे भाई को स्थानीय पद दिलवा दिया और कहा 'जिसकी लाठी उसकी भैंस'
            १८.कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा                      जोड़ा
अर्थ:-इधर उधर की सामान इकट्ठे करके नया सामान बनाना
प्रयोग:- प्रोफेसर सब के शोध का विश्लेषण कर रहे थे तभी उन्हें लगा कि एक शोधार्थी ने बस कहीं कहीं से तथ्य इकट्ठे कर के बिन समझे लिख दिया है,उन्होंने उससे कहा "अरे ये क्या लिखा है यह तो ऐसा लग रहा है कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा"
            १९ खोदा पहाड़ निकला चूहा
अर्थ:-बहुत कोशिश के बाद कम लाभ
प्रयोग:- काफी दूरी चल करके यात्री एक जगह बस के लिए गए तब पता चला कि उनकी बस पहले ही छूट गयी है और दूसरे बस में भीड़ अधिक होने पर खड़े होकर जाना पड़ा। यह तो ऐसी बात हो गयी खोदा पहाड़ निकला चूहा।
             २०.कहे से कुम्हार गधे पर नही चढ़ता
अर्थ:- नियमित काम करने वाले कभी मनौवल से भी नहीं
मानते
प्रयोग:- वैसे तो मेरा छोटा भाई चित्रकला में  अभ्यस्त है पर मेहमानों के सामने उसने अपनी कला में प्रदर्शन से मना कर दिया, ठीक ही है कहे से  कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ता।



         ■◆●■◆●■◆●■◆●■◆●■◆●■◆●■◆●■

देखे यह भी
Facebook Link:- Seema Sharma As Blogger